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Showing posts from August, 2025

प्रहरी हैं हम

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  प्रहरी हैं हम🙏 'मन से मंच तक’ मातृभूमेः प्रियं व्रतम् , तिरङ्गस्य च पूजनम्।   मरणं वा जीवनं वा , राष्ट्राय समर्पणम्॥ अर्थात जिसके लिए मातृभूमि की सेवा ही जीवन का परम उद्देश्य है , जो तिरंगे को श्रद्धा से पूजता है , और जिसके लिए जीवन या मृत्यु दोनों ही राष्ट्र के लिए समर्पित हैं—वही सच्चा राष्ट्रभक्त है, वही प्रहरी है| यह रहा आपके अनुरोध का हिंदी अनुवाद, भावनात्मक और सांस्कृतिक गहराई के साथ: प्रहरी मंच महिला काव्य मंच ट्रस्ट का एक विशिष्ट और सम्मानित अंग है, जिसकी स्थापना प्रसिद्ध कवि एवं इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी श्री नरेश गुप्ता 'नाज़' जी द्वारा की गई थी। एक दूरदर्शी विचारक के रूप में, श्री नाज़ का सदैव यह विश्वास रहा कि विश्वभर की महिलाओं को एक समर्पित साहित्यिक मंच मिलना चाहिए—महिलाओं का, महिलाओं के लिए, और महिलाओं द्वारा। इसी उदात्त विचार को साकार करने हेतु उन्होंने 22 जनवरी 2017 को पटियाला, पंजाब में महिला काव्य मंच ट्रस्ट की स्थापना की, जिसे बाद में 15 अक्टूबर 2018 को दिल्ली में औपचारिक रूप से पंजीकृत किया गया। उसी सेवा भावना और रचनात्मक ऊर...

निमंत्रण

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FLYER 24.08.2025

 

FLYER-2

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चतुर्थ वार्षिकोत्सव 2025

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पन्‍द्रह अगस्‍त / गिरिजाकुमार माथुर

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  पन्‍द्रह अगस्‍त / गिरिजाकुमार माथुर आज जीत की रात पहरुए सावधान रहना ! खुले देश के द्वार अचल दीपक समान रहना ! प्रथम चरण है नए स्‍वर्ग का है मंज़िल का छोर इस जन-मन्‍थन से उठ आई पहली रत्‍न हिलोर अभी शेष है पूरी होना जीवन मुक्‍ता डोर क्‍योंकि नहीं मिट पाई दुख की विगत साँवली कोर ले युग की पतवार बने अम्‍बुधि महान रहना पहरुए, सावधान रहना ! विषम शृँखलाएँ टूटी हैं खुली समस्‍त दिशाएँ आज प्रभंजन बन कर चलतीं युग बन्दिनी हवाएँ प्रश्‍नचिह्न बन खड़ी हो गईं यह सिमटी सीमाएँ आज पुराने सिंहासन की टूट रही प्रतिमाएँ उठता है तूफ़ान इन्‍दु तुम दीप्तिमान रहना पहरुए, सावधान रहना ! ऊँची हुई मशाल हमारी आगे कठिन डगर है शत्रु हट गया, लेकिन उसकी छायाओं का डर है शोषण से मृत है समाज कमज़ोर हमारा घर है किन्‍तु आ रही नई ज़िन्‍दगी यह विश्‍वास अमर है जन-गंगा में ज्‍वार लहर तुम प्रवहमान रहना पहरुए, सावधान रहना !