निमंत्रण
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सीमा पर जो खड़ा हुआ है, वो दीपक है अंधियारे में, शौर्य लिखे हैं उसके कदम, हर एक धड़कन प्यारे में। धूप, बर्फ या बारिश हो, ना रुके वो ना थकता है, माँ की ममता छोड़ चला, पर वतन से ना बिछड़ता है। तिरंगे की छांव में जीता, तिरंगे में ही लिपटता है, हर साँस में भारत बसा है, हर पल वो बस लड़ता है। नींद हमारी चैन से हो, इसलिए वो जागा रहता है, गोली खाकर मुस्काए वो, दर्द भी गीतों में बहता है। वीर वही जो मौन रहे, पर कर्मों से गूंजे जग, उसके बलिदान से ही तो, महके हैं ये धरती-फग।
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