प्रहरी हैं हम

 प्रहरी हैं हम🙏

'मन से मंच तक’



मातृभूमेः प्रियं व्रतम्, तिरङ्गस्य च पूजनम्। 

मरणं वा जीवनं वा, राष्ट्राय समर्पणम्॥

अर्थात जिसके लिए मातृभूमि की सेवा ही जीवन का परम उद्देश्य है, जो तिरंगे को श्रद्धा से पूजता है, और जिसके लिए जीवन या मृत्यु दोनों ही राष्ट्र के लिए समर्पित हैं—वही सच्चा राष्ट्रभक्त है, वही प्रहरी है|

यह रहा आपके अनुरोध का हिंदी अनुवाद, भावनात्मक और सांस्कृतिक गहराई के साथ:


प्रहरी मंच महिला काव्य मंच ट्रस्ट का एक विशिष्ट और सम्मानित अंग है, जिसकी स्थापना प्रसिद्ध कवि एवं इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी श्री नरेश गुप्ता 'नाज़' जी द्वारा की गई थी। एक दूरदर्शी विचारक के रूप में, श्री नाज़ का सदैव यह विश्वास रहा कि विश्वभर की महिलाओं को एक समर्पित साहित्यिक मंच मिलना चाहिए—महिलाओं का, महिलाओं के लिए, और महिलाओं द्वारा। इसी उदात्त विचार को साकार करने हेतु उन्होंने 22 जनवरी 2017 को पटियाला, पंजाब में महिला काव्य मंच ट्रस्ट की स्थापना की, जिसे बाद में 15 अक्टूबर 2018 को दिल्ली में औपचारिक रूप से पंजीकृत किया गया।

उसी सेवा भावना और रचनात्मक ऊर्जा के साथ, प्रहरी मंच का गठन सितंबर 2021 में किया गया।

मक़ाम ट्रस्ट, जो “मन से मंच तक” के प्रेरणादायक नारे के साथ कार्य करता है, भाषा की सीमाओं से परे समावेशिता को बढ़ावा देता है। फिर भी इसकी आत्मा हिंदी के प्रचार-प्रसार में रची-बसी है, जहाँ कविता को देशभक्ति की भावना और सामाजिक चेतना जागृत करने के माध्यम के रूप में अपनाया गया है। इस ट्रस्ट का कुशल नेतृत्व इसकी अध्यक्ष श्रीमती नियति भारद्वाज जी के हाथों में है।

प्रहरी मंच एक अनोखा साहित्यिक समूह है, जो भारत के वीर प्रहरी—सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों, बीएसएफ, पुलिस और उनके परिवारों से जुड़े भावनात्मक लेखकों और कवियों को एकत्र करता है। इसकी विभिन्न शाखाएँ प्रतिमाह ऑनलाइन काव्य गोष्ठियाँ आयोजित करती हैं, जहाँ अनुभवी कवियों के साथ-साथ वे सैनिक भी अपनी भावनाएँ साझा करने का अवसर पाते हैं, जो अब तक चुपचाप लिखते रहे लेकिन मंच पर आने से संकोच करते थे। आत्मविश्वास को पोषित कर, राष्ट्रवाद की भावना को जागृत कर, और सामाजिक चेतना को प्रज्वलित कर, प्रहरी मंच अपने उद्देश्य को पूर्ण करता है।

आज यह संगठन केवल भारत तक सीमित नहीं है। विदेशों में रहने वाले भारतीय सैनिकों के परिवारजन भी इसमें सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, जिससे प्रहरी मंच को एक वैश्विक पहचान प्राप्त हुई है। भारत के तेरह राज्यों में इसकी सक्रिय शाखाएँ हैं, और विस्तार की योजनाएँ निरंतर प्रगति पर हैं। यह मंच साहित्य की ज्योति को दूर-दूर तक फैलाता जा रहा है।

इस साहित्यिक आंदोलन के अग्रदूत हैं—वैश्विक अध्यक्ष श्रीमती शालू गुप्ता जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. ममता झा 'रुद्रांशी' जी, संरक्षक डॉ. मेह प्राची गर्ग जी, और राष्ट्रीय सचिव डॉ. मीता गुप्ता जी। इनके मार्गदर्शन में प्रहरी मंच प्रगति के पथ पर अग्रसर है, जहाँ कविता के माध्यम से स्वर, हृदय और राष्ट्र एक सूत्र में बंधते हैं।


वरिष्ठ कवि एवं केंद्रीय खुफिया विभाग (आई बी)के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी डॉ नरेश गुप्ता नाज़ के मन में हमेशा से एक विचार था कि महिलाएं जो कविता की मूल स्रोत हैं उनकी विश्व स्तर पर एक काव्य संस्था होनी चाहिए जो महिलाओं की, महिलाओं के लिए और महिलाओं द्वारा संचालित हो।इसी विचार को मूर्त रूप देने के लिए 22.01.2017 को श्री नरेश नाज़ द्वारा महिला काव्य मंच ट्रस्ट का पटियाला (पंजाब) में गठन किया गया  जिसका दिल्ली में  15.10.2018 को पंजीकरण हुआ। 
डॉ नाज़ जी किसी परिचय के मोहताज नहीं, वे एक नामचीन शायर, गीतकार एवं राष्ट्रवादी कवि हैं।उन्होंने प्रहरी मंच मकाम की स्थापना की, जिसका परम उद्देश्य था कि इसके अंतर्गत साहित्य की त्यागश्रद्धा और समर्पण की काव्य-त्रिवेणी बहती रहे। इस पुनीत भाव को जन-जन तक पहुँचाने के निमित्त राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रहरी मंच को स्थापित कर दिया है।
प्रहरी मंच से साहित्य में रुचि रखने वाले देश की सुरक्षा में तैनात जाँबाज़ प्रहरियों यथा; भारतीय सेना के तीनों अंग, अर्धसैन्य बल, बीएसएफ और पुलिस में काम करने वाले और उनके परिवार के रचनाकारों का समूह है। प्रहरी मंच में देश ही नहीं विदेश से भी भारतीय सैनिकों के परिजन जुड़े हुए हैं।मकाम का स्लोगन 'मन से मंच तक’  रखा गया। मकाम में भाषा का कोई बंधन नही है लेकिन हिंदी को आगे बढ़ाना और कविता के माध्यम से राष्ट्र जागरण करना ही मकाम ट्रस्ट का मूल उद्देश्य है। मकाम ट्रस्ट की अध्यक्ष श्रीमती नियति भारद्वाज है।
मकाम से समाज का हर वर्ग जुड़े इस लिए कोई सदस्यता शुल्क नही लिया जाता। मकाम के 9 ट्रस्टी और विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों के प्रयासों से आज मकाम ट्रस्ट पूरे विश्व में हिन्दी कविता का अलख जगा रहा है।
महिला काव्य मंच ट्रस्ट का उद्देश्य है कि कविता घर घर पहुंचे और स्त्री, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चों को कविता लिखने को प्रेरित किया जाए और उन्हें अपनी कविताओं के लिए मंच मिले। मासिक गोष्ठियों और काव्य सम्मेलनों का ये सिलसिला चलता रहा और महिला काव्य मंच ट्रस्ट से विभिन्न वर्गों के कवि/कवयित्री जुड़ते गए। मकाम ट्रस्ट के अंतर्गत निम्न प्रकोष्ठ आते हैं
मुख्य महिला काव्य मंच
वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच (वनकाम) 
प्रहरी मंच
बाल मंच
शिक्षा मंच
युवा मंच
बाल मंच
भक्ति मंच
भारत के तेरह राज्यों में इसकी शाखाएं हैं तथा अन्य राज्यों में शीघ्र ही खोली जाएंगी।

वीरत्वं न शब्देन, कर्मणा हि प्रकाशते। 

यस्य त्यागे वसुधा च, गर्वं अनुभवति सदा॥

🌺 सच्चा वीर वह नहीं जो वीरता के दावे करता है, बल्कि वह है जिसकी कर्मभूमि ही उसकी पहचान बनती है। उसके त्याग और समर्पण से संपूर्ण पृथ्वी गर्वित होती है। ऐसे वीर की महिमा शब्दों से नहीं, उसके कर्मों से गूंजती है।

जय हिंद!
जय भारत!



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